Monday, 27 April 2020

"विमानन और पहली उड़ान"

                    "विमानन और पहली उड़ान"
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                        -  डॉ दीपक कोहली -
जब भी हवाई जहाज़ के अविष्कार की बात होती है तो इसका श्रेय राइट बंधुओं को दिया जाता है। लेकिन भारतीय विज्ञान कांग्रेस के इस पर्चे और फिर कुछ न्यूज़ चैनलों और एक फिल्म (हवाईज़ादा) में बताया गया कि यह आविष्कार एक भारतीय ने किया था। टी.वी. न्यूज़ चैनलों में बताया गया कि राइट बंधुओं ने हवाई जहाज़ का आविष्कार 17 दिसंबर 1903 को किया था जबकि उससे लगभग आठ साल पहले शिवकर बापूजी तलपदे नाम के एक मराठा ने 1895 में हवाई जहाज़ तैयार कर लिया था। बताया गया कि यह हवाई जहाज़ 1500 फीट ऊपर उड़ा और फिर वापस नीचे गिर गया। इसका परीक्षण मुंबई के एक समुद्र तट पर किया गया था।
तो सच्चाई क्या है? यहां दो सवाल हैं – पहला कि क्या तलपदे ने ऐसा कोई आविष्कार किया था और दूसरा कि क्या उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा या जानकारी किसी प्राचीन (वैदिक) ग्रंथ से मिली थी। इसी से जुड़ा तीसरा सवाल यह भी है कि क्या ऐसा कोई वैदिक ग्रंथ अस्तित्व में भी है।
शिवकर बापूजी तलपदे के जीवन और उनके आविष्कार का विवरण काफी उलझा हुआ है। कुछ विवरणों के अनुसार, उन्होंने वैदिक ग्रंथ वैमानिकी प्रकरण में उल्लेखित विमानन के विचारों को अपनाकर एक विमान बनाया था और बड़ौदा के तत्कालीन महाराज और कई अन्य लोगों की उपस्थिति में 1895 में उड़ाया था। कुछ विवरण बताते हैं कि यह प्रयोग उन्होंने मुंबई के नज़दीक मड टापू पर किया था जबकि अन्य विवरण गिरगांव चौपाटी को मौका-ए-वारदात बताते हैं। कुछ ने दावा किया है कि तलपदे ने र्इंधन के रूप में पारे का इस्तेमाल किया था, जबकि अन्य का कहना है कि इसमें किसी प्रकार के मूत्र का उपयोग किया गया था।
तलपदे के जीवन पर सबसे विस्तृत विवेचन वास्तुविद इतिहासकार प्रताप वेलकर ने लगभग 20 साल पहले लिखी अपनी किताब महाराष्ट्रचा उज्जवल इतिहास में किया है। वेलकर ने बड़ौदा के महाराज के उपस्थित होने की बातों को खारिज करते हुए कहा है कि यह एक खेल आयोजन की तरह था जिसमें तलपदे के कुछ साथी मौजूद थे।
वेलकर के अनुसार, तलपदे का विमान ‘मारुतसखा’ (कहीं-कहीं इसे ‘मारुतशक्ति’ भी कहा गया है) बांस से बनी एक बेलनाकार संरचना थी। यह पंखों वाला ग्लाइडर नहीं था जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है। ईंधन के रूप में तरल पारा इस्तेमाल किया गया था। वेलकर के मुताबिक पारा सूर्य के प्रकाश के साथ अभिक्रिया करता है तो उससे हाइड्रोजन उत्पन्न होती है। चूंकि हाइड्रोजन हवा की तुलना में हल्की है, यह विमान को उड़ने में मदद करती है। वैसे बाद में किसी ने यह भी कहा है कि दरअसल पारे का उपयोग पारे के आयनों की मदद से विमान को उड़ाने का था। वेलकर कहते हैं कि विमान न तो बहुत ऊंचा उड़ा और ना ही हवा में बहुत लंबे समय तक रहा। यह सिर्फ थोड़ी ऊंचाई तक गया और कुछ ही मिनटों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस कथा के कई अलग-अलग विवरण उपलब्ध हैं।
वर्ष 2016 में इस विषय पर हवाईज़ादा नाम से एक बॉलीवुड फिल्म रिलीज़ हुई थी। कहानी को रोचक बनाने के लिए कुछ और बाहरी विचारों को भी शामिल किया गया। फिल्म के मुताबिक यह उड़ान सफल रही थी, और इसके आविष्कारक ने खुद इसे उड़ाया था। दूसरी ओर, इस घटना के विवरणों में यह भी कहा गया है कि कोशिश तो मानव रहित विमान बनाने की थी।
हवाईज़ादा के निर्देशक विभु पुरी का दावा है कि उन्होंने करीब चार साल तक शोध किया है। उनके अनुसार कुछ चीज़ें विरोधाभासी लगीं, इसलिए उन्होंने एक काल्पनिक संस्करण बनाया। उनका कहना है कि उनकी फिल्म एक बायोपिक तो नहीं है लेकिन सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में बापू तलपदे का किरदार निभाने वाले आयुष्मान खुराना का कहना है कि हवाईज़ादा कोई डाक्यूमेंट्री नहीं है बल्कि मनोरंजन के लिए बनाई गई फिल्म है।
वैमानिक शास्त्र
कथित रूप से जिस वैमानिकी प्रकरण को पढ़कर व जिसके आधार पर तलपदे ने मारुतसखा बनाया था उसके बारे में कहा जाता है कि हज़ारों साल पहले भारद्वाज नाम के एक ऋषि ने उसकी रचना की थी। इसमें आठ अध्यायों में लगभग 3000 श्लोक हैं और दावा है कि वैदिक महाकाव्यों में वर्णित ‘विमान’ उन्नत स्तर की उड़ने वाली मशीनें थीं।
इस विषय पर एक मराठी पुस्तक के लेखक आर्य समाज, पुणे के सचिव माधव देशपांडे का दावा है कि उन्हें तलपदे द्वारा हस्तलिखित कुछ नोट्स मिले हैं। देशपांडे का कहना है कि वायु वेदनाओं का सिद्धांत हमारे वेदों में मौजूद था और बापू तलपदे ने उसी सिद्धांत को साकार रूप प्रदान किया था।
दूसरी ओर, 1974 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलुरु के वैज्ञानिकों ने ग्रंथ में वर्णित सिद्धांतों की जांच करने के बाद एक अध्ययन प्रकाशित किया, और निष्कर्ष निकाला कि यह रचना प्राचीन तो कदापि नहीं है। उनके अनुसार यह ग्रंथ 1904 से पहले का कदापि नहीं है।
ग्रंथ के अध्ययन से यह भी साफ हो जाता है कि इसमें प्रस्तुत अधिकांश सिद्धांत कामकाजी स्तर पर असंभव हैं। तलपदे द्वारा बनाए गए मॉडलों में कोई भी उड़ने में सफल नहीं हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार ग्रंथ में वर्णित विमानों में कोई वास्तविकता नहीं है बल्कि सब कुछ मनगढ़ंत है। आगे उनका कहना है कि ग्रंथ में वर्णित किसी भी विमान में उड़ान भरने के गुण या क्षमताएं नहीं हैं। उड़ान के दृष्टिकोण से इनकी संरचना अकल्पनीय रूप से भयावह है और प्रणोदन के जो सिद्धांत इसमें प्रस्तुत किए गए हैं, वे उड़ान में मदद करने के बजाय इसका प्रतिरोध करते हैं।
इसमें ‘समरांगण सूत्रधार’ नामक अध्याय में तो यह भी कहा गया है कि इस ज्ञान का उपयोग बुरे उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाने लगे इसलिए इसके निर्माण और अन्य विशेषताओं का विस्तृत वर्णन नहीं दिया जा सकता है। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष था कि “इतिहास में हमें दुर्भाग्यपूर्ण बात यह लगती है कि अतीत में कुछ भी मिल जाए, तो कुछ लोग बगैर किसी प्रमाण के उसका महिमामंडन और गुणगान करने लगते हैं। हमें लगता है कि प्रकाशन से जुड़े लोग ही पांडुलिपियों के इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने या छिपाने के लिए पूर्णत: दोषी हैं।”
वेलकर बताते हैं कि चौपाटी पर शो की विफलता के बाद, तलपदे ने एक और विमान बनाने के लिए धन जुटाने की कोशिश की। उन्होंने बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा और अहमदाबाद में व्यवसायियों के एक समूह से अपील भी की थी जिसका रिकॉर्ड भी मौजूद है। कुछ संस्करणों में बताया गया है कि चौपाटी शो में इस्तेमाल किया गया क्षतिग्रस्त विमान मुंबई के मलाड इलाके में एक गोदाम में रखा गया था। बाद में विमान को टाटा कंपनी के रैलिस ब्रादर्स को बेच दिया गया था, जबकि कुछ अन्य लोगों के अनुसार इसे बैंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को दे दिया गया था। जब वेलकर ने इसकी और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की तो पता चला कि इससे जुड़े कागज़ात केंद्रीय रक्षा मंत्रालय में हैं। जिस अंतिम व्यक्ति ने इनका विस्तार से अध्ययन किया था उन्होंने बताया कि तलपदे असफल रहे थे।
हवाईज़ादा के निर्देशक विभु पुरी का दावा है कि उन्होंने करीब चार साल तक शोध किया है। उनके अनुसार कुछ चीज़ें विरोधाभासी लगीं, इसलिए उन्होंने एक काल्पनिक संस्करण बनाया। उनका कहना है कि उनकी फिल्म एक बायोपिक तो नहीं है लेकिन सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में बापू तलपदे का किरदार निभाने वाले आयुष्मान खुराना का कहना है कि हवाईज़ादा कोई डाक्यूमेंट्री नहीं है बल्कि मनोरंजन के लिए बनाई गई फिल्म है।
कथित रूप से जिस वैमानिकी प्रकरण को पढ़कर व जिसके आधार पर तलपदे ने मारुतसखा बनाया था उसके बारे में कहा जाता है कि हज़ारों साल पहले भारद्वाज नाम के एक ऋषि ने उसकी रचना की थी। इसमें आठ अध्यायों में लगभग 3000 श्लोक हैं और दावा है कि वैदिक महाकाव्यों में वर्णित ‘विमान’ उन्नत स्तर की उड़ने वाली मशीनें थीं।
इस विषय पर एक मराठी पुस्तक के लेखक आर्य समाज, पुणे के सचिव माधव देशपांडे का दावा है कि उन्हें तलपदे द्वारा हस्तलिखित कुछ नोट्स मिले हैं। देशपांडे का कहना है कि वायु वेदनाओं का सिद्धांत हमारे वेदों में मौजूद था और बापू तलपदे ने उसी सिद्धांत को साकार रूप प्रदान किया था।
दूसरी ओर, 1974 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलुरु के वैज्ञानिकों ने ग्रंथ में वर्णित सिद्धांतों की जांच करने के बाद एक अध्ययन प्रकाशित किया, और निष्कर्ष निकाला कि यह रचना प्राचीन तो कदापि नहीं है। उनके अनुसार यह ग्रंथ 1904 से पहले का कदापि नहीं है।
ग्रंथ के अध्ययन से यह भी साफ हो जाता है कि इसमें प्रस्तुत अधिकांश सिद्धांत कामकाजी स्तर पर असंभव हैं। तलपदे द्वारा बनाए गए मॉडलों में कोई भी उड़ने में सफल नहीं हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार ग्रंथ में वर्णित विमानों में कोई वास्तविकता नहीं है बल्कि सब कुछ मनगढ़ंत है। आगे उनका कहना है कि ग्रंथ में वर्णित किसी भी विमान में उड़ान भरने के गुण या क्षमताएं नहीं हैं। उड़ान के दृष्टिकोण से इनकी संरचना अकल्पनीय रूप से भयावह है और प्रणोदन के जो सिद्धांत इसमें प्रस्तुत किए गए हैं, वे उड़ान में मदद करने के बजाय इसका प्रतिरोध करते हैं।
इसमें ‘समरांगण सूत्रधार’ नामक अध्याय में तो यह भी कहा गया है कि इस ज्ञान का उपयोग बुरे उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाने लगे इसलिए इसके निर्माण और अन्य विशेषताओं का विस्तृत वर्णन नहीं दिया जा सकता है। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष था कि “इतिहास में हमें दुर्भाग्यपूर्ण बात यह लगती है कि अतीत में कुछ भी मिल जाए, तो कुछ लोग बगैर किसी प्रमाण के उसका महिमामंडन और गुणगान करने लगते हैं। हमें लगता है कि प्रकाशन से जुड़े लोग ही पांडुलिपियों के इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने या छिपाने के लिए पूर्णत: दोषी हैं।”
वेलकर बताते हैं कि चौपाटी पर शो की विफलता के बाद, तलपदे ने एक और विमान बनाने के लिए धन जुटाने की कोशिश की। उन्होंने बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा और अहमदाबाद में व्यवसायियों के एक समूह से अपील भी की थी जिसका रिकॉर्ड भी मौजूद है। कुछ संस्करणों में बताया गया है कि चौपाटी शो में इस्तेमाल किया गया क्षतिग्रस्त विमान मुंबई के मलाड इलाके में एक गोदाम में रखा गया था। बाद में विमान को टाटा कंपनी के रैलिस ब्रादर्स को बेच दिया गया था, जबकि कुछ अन्य लोगों के अनुसार इसे बैंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को दे दिया गया था। जब वेलकर ने इसकी और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की तो पता चला कि इससे जुड़े कागज़ात केंद्रीय रक्षा मंत्रालय में हैं। जिस अंतिम व्यक्ति ने इनका विस्तार से अध्ययन किया था उन्होंने बताया कि तलपदे असफल रहे थे।
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प्रेषक  -  डॉ दीपक कोहली, 5 / 104,  विपुल खंड, गोमती नगर, लखनऊ -  226010 (उत्तर प्रदेश)

Saturday, 20 July 2019

भारत के राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य
                  -   डॉ दीपक कोहली 
1. भारतीय वनों में से किसमें अब बाघ नही हैं?
(A)कार्बेट नेशनल पार्क  (B) गिर नेशनल पार्क 
(C) मानस टाइगर सैंक्चुअरी (D) सरिस्का वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी
 (Ans : D)

2. भारत के सभी जैव मण्डलीय आरक्षित क्षेत्रों में से चार को यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व विरासत जाल तंत्र में मान्यता दी।कौन-सा एक उनमें से नहीं है? 
(A) मन्नार की खाड़ी (B) कंचनजंघा (C) नन्दा देवी (D) सुन्दर वन
 (Ans : B)

3. चन्द्रप्रभा वन्य जीव अभयारण्य किस राज्य मे  है? 
(A) उत्तर प्रदेश (B) मध्य प्रदेश (C) उत्तराखण्ड (D) ओडिशा
 (Ans : A)

4. किस राज्य में काजीरंगा वन्यजीव विहारहै? 
(A) बिहार (B) तमिलनाडु (C) असोम (D) केरल 
(Ans : C)

5. रणथम्भौर वन्य प्राणी अभयारण् कहा है तथा किसके लिए प्रसिद्ध है? 
(A) गुजरात-बब्बर शेर (B) राजस्थान-काला हिरण (C) राजस्थान-बब्बर शेर (D) गुजरात-जंगली गधा 
(Ans : C)

6. नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान कहा है? 
(A) उत्तर प्रदेश (B) मध्य प्रदेश (C) छत्तीसगढ़ (D) उत्तराखंड 
(Ans : D)

7. बांदीपुर प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व कहा है? 
(A) असम (B) मध्य प्रदेश (C) कर्नाटक (D) राजस्थान 
(Ans : C)

8. हाथी कौन से राष्ट्रीय उद्यान में मिलता है? 
(A) नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (B) बोरीविली राष्ट्रीय उद्यान 
(C) दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (D) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
(Ans : A)

9. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान कहा है? 
(A) छत्तीसगढ़ (B) मध्य प्रदेश (C) असम (D) राजस्थान
 (Ans : B)

10. मानस वन्य जीव अभयारण्य कहा है? 
(A) अरुणाचल प्रदेश (B) असोम (C) सिक्किम (D) मिजोरम 
(Ans : B)

11. नोक्रेक जीवमण्डल रिजर्व किस राज्य मे है? 
(A) अरुणाचल प्रदेश (B) असोम (C) सिक्किम (D) मेघालय
 (Ans : D)

12. दाचिगाम वन्य जीव अभयारण्य किस राज्य में स्थित है? 
(A) पश्चिम बंगाल (B) मध्य प्रदेश (C) छत्तीसगढ़ (D) जम्मू-कश्मीर
 (Ans : D)

13. कौन-सा राष्ट्रीय उद्यान प्रोजेक्ट टाइगर के अन्तर्गत नहीं आता है? 
(A) कान्हा-किसली (B) रणथम्भौर (C) जिम कार्बेट (D) बान्धवगढ़
 (Ans : D)

14. भारत में सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य (रिजर्व) कौन सा है– 
(A) नागार्जुन (B) मानस (C) पेंच (D) कार्बेट
 (Ans : D)

15. गिर के शेरों को रखे जाने के लिए कौन से राष्ट्रीय पार्क/अभयारण्य का चयन किया गया है? 
(A) पेंच (B) कान्हा (C) बाँधवगढ़ (D) पालपुर क्रनो 
(Ans : D)

16. केवलादेव घाना पक्षी विहार कहाँ है? 
(A) अलवर (राजस्थान) (B) भरतपुर (राजस्थान) 
(C) सवाई माधोपुर (राजस्थान) (D) चिंगलपेट (तमिलनाडु) 
(Ans : B)

17. सरिस्का पक्षी विहार कहाँ है? 
(A) हरियाणा (B) गुजरात (C) राजस्थान (D) मध्य प्रदेश
 (Ans : C)

18. किस बाघ संरक्षण स्थल से हाल में बाघों का गुप्त रूप से अदृश्य होने की खबर है? 
(A) रणथम्भौर (B) सिमलीपाल (C) सरिस्का (D) भरतपुर
 (Ans : C)

19. जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान कहाँ है? 
(A) उत्तरी प्रदेश (B) उत्तराखंड (C) मध्य प्रदेश (D) हि. प्र.
 (Ans : B)

20. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान कहा  है? 
(A) मध्य प्रदेश (B) उत्तर प्रदेश (C) तमिलनाडु (D) ओडिशा
 (Ans : B)
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प्रेषक: डॉ दीपक कोहली5/104, विपुल खंड ,गोमती नगर,  लखनऊ -226010 ( मोबाइल- 9454410037)

Thursday, 25 January 2018

SERIOUS THREAT : SMOG

Word smog is derived from smoke and fog. It is really a serious threat to humanity. Now a days the menace of smog is spreading very fast due to increasing air pollution.
In the days of winter due to heaviness of air pollutants could not escape and remain in the environment and it is really very chocking condition . So early morning walkers and people suffering from bronchitis and highly blood pressure patients are seriously affected. Fine knitted masks are advised to combat smog conditions.